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Bihar Anganwadi: आंगनवाड़ी टेक होम राशन व्यवस्था में बड़ा बदलाव, अब मिलेगा रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-इट पोषण आहार

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Alam Ki Khabar: Bihar News के तहत बिहार सरकार ने आंगनवाड़ी टेक होम राशन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को रेडी-टू-कुक व रेडी-टू-इट प्रीमिक्स पोषण आहार उपलब्ध कराया जाएगा।

पटना, 5 अगस्त। आलम की खबर: बिहार सरकार ने राज्य की आंगनवाड़ी सेवाओं से जुड़ी टेक होम राशन (THR) व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए वर्षों से चली आ रही पारंपरिक वितरण प्रणाली को बदलने का फैसला लिया है। अब लाभार्थियों को पहले की तरह केवल सूखा राशन नहीं दिया जाएगा, बल्कि उसकी जगह वैज्ञानिक तरीके से तैयार रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-इट प्रीमिक्स पोषण आहार उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं तक बेहतर गुणवत्ता वाला संतुलित पोषण पहुंचेगा, वहीं वितरण प्रणाली में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

समाज कल्याण विभाग के निर्देश के अनुसार यह नई व्यवस्था सुपौल सहित बिहार के सभी जिलों में लागू की जा रही है। इसका लाभ छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं तथा गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को मिलेगा। विभाग का उद्देश्य मातृ एवं शिशु कुपोषण को कम करना और शुरुआती उम्र में बच्चों के शारीरिक तथा मानसिक विकास को बेहतर बनाना है।

नई व्यवस्था के तहत टेक होम राशन की आपूर्ति की जिम्मेदारी बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉन्फेड) को सौंपी गई है। अब लाभार्थियों को न्यूट्री राइस खिचड़ी प्रीमिक्स, न्यूट्री पुलाव, फोर्टिफाइड मूंग दाल-चावल खिचड़ी, मल्टीमिक्स अनाज एवं प्रोटीन प्रीमिक्स तथा फोर्टिफाइड नमकीन दलिया जैसे पौष्टिक खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराए जाएंगे। पंजीकृत लाभार्थियों की संख्या के अनुसार यह सामग्री सीधे संबंधित आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचाई जाएगी।

सरकार का कहना है कि नई प्रणाली में तैयार प्रीमिक्स खाद्य सामग्री निर्धारित पोषण मानकों के अनुसार तैयार होगी। इससे बच्चों को आवश्यक प्रोटीन, विटामिन और सूक्ष्म पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिल सकेंगे। गर्भवती और धात्री महिलाओं को भी संतुलित पोषण मिलने से मातृ स्वास्थ्य में सुधार और नवजात शिशुओं के बेहतर विकास में मदद मिलने की उम्मीद है।

दरअसल, पिछले कई वर्षों से टेक होम राशन वितरण को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। कई स्थानों पर लाभार्थियों ने आरोप लगाया कि निर्धारित मेन्यू के बजाय केवल चावल, दाल या सोयाबीन देकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती थी। खाद्य तेल, मसाले, नमक और अन्य आवश्यक सामग्री कई बार पूरी मात्रा में नहीं मिलती थी। वितरण में अनियमितता और हकमारी की शिकायतें भी समय-समय पर उठती रही हैं।

नई प्रीमिक्स व्यवस्था लागू होने के बाद सरकार को उम्मीद है कि राशन वितरण में मनमानी पर रोक लगेगी और प्रत्येक लाभार्थी तक तय मात्रा में गुणवत्तापूर्ण पोषण सामग्री पहुंचेगी। पैक्ड खाद्य सामग्री होने के कारण गुणवत्ता बनाए रखना भी पहले की तुलना में आसान होगा। इससे आंगनवाड़ी सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ने और लाभार्थियों को वास्तविक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

पोषण विशेषज्ञों का भी मानना है कि शुरुआती उम्र में संतुलित आहार बच्चों के मस्तिष्क और शरीर के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि नई व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो कुपोषण की समस्या कम करने में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। हालांकि इसकी सफलता नियमित आपूर्ति, गुणवत्ता नियंत्रण और पारदर्शी वितरण व्यवस्था पर निर्भर करेगी।

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बिहार सरकार की यह नई पहल केवल राशन वितरण प्रणाली बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि मातृ एवं शिशु पोषण को बेहतर बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। अब देखना होगा कि नई व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है और लाभार्थियों को इसका वास्तविक लाभ कितनी तेजी से मिल पाता है।

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